नाम नहीं लुंगी इस कविता मे तुम्हारा..
बस तुम समझ जाना मेरा इशारा !!
दो वर्ष पुर्व तुम मेरी ज़िन्दगी में आयी थी..
उस वक़्त तुम facebook की महामाई थी!!
एक दिन पहुँच गये inbox में तुम्हारे..
लगने लग गये तुम्हारे हर शब्द प्यारे!!
सोचा नहीं था हो जाओगे तुम इतने खास..
बीकानेर की रानी होगी हमारे दिल के इतने पास!!
फ़िर अन्जानी से मिले अजनबी में बाते हुई अपार
सुबह के good morning से रात के एक से चार !!
गर्मी की भरी जुन में तुम आई गुलाबी नगरी में..
चंद मिनटो की मुलाकात बस गयी दिल में !!
सोच दोनो की अलग है एक की नौ तो एक की सात..
पर दिल से दोनो सच्चे हैं तभी तो जुडे हैं एक साथ !!
अब तो जैसे तुम मेरे लिये एक प्यारा सा अत्र हो..
जीवन हमेशा खुशबुदार रहेगा तुम जो मेरी मित्र हो!!
लडते-झगड़ते हो जाती हैं कभी अनबन..
पर कैसे रहे ये पिहु तुम्हारे बिन *अंजन* !!
क्या हो तुम हमारे लिये समझ गयी जो आप..
दोनो मिलकर छोडेन्गे दोस्ती की नयी छाप !!
*PJ कि कलम * ✍ PJ ❤

शानदार
ReplyDeleteउत्तम
अतिउत्तम
👌👌👌☺️
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