रुठे साजन!! रुठे साजन!!
पास हमारे आओ ना !
तुम इतना गुस्सा होकर रह लेते
कैसे? हमको भी बतलाओ ना!!
हम को तुमसे एक पल की भी
दुरी सही जाये ना.. तुम कैसे
रह लेते हो हमको भी बतलाओ ना!!
हमको गले लगाओ ना
पास हमारे आओ ना!!
हवा जैसे तुम बिखर जाते हो
मुझको बडा तडपाते हो!!
बिन मौसम बरसात जैसे
झम - झम बरस जाते हो!!
तुम इतना गुस्सा दिखा कर
मुझको लाल-पिला कर जाते हो!!
फ़िर जब मेरी खोपड़ी घुमे
तुम होले-होले मुझे रिझाते हो!!
रुठे साजन!! रुठे साजन!!
अब उबल रहा मेरा भी खुन हैं..
हो जाउ न कही मे भी गुस्सा
फ़िर ना कहना की मेरी भुल हैं!!
*ज़ज़्बाती कलम* ✍ PJ

