Friday, 16 November 2018

काल्पनिक व्यक्ति के लिए वास्तविक प्रेम ❤


पिछली साल की सावन में सोचा था तुम जनवरी तक आओगे,
जनवरी की उन सर्द हवाओं में होले से ये दूरियाँ मिटाओगे।

जनवरी गया,चैत्र गया , सावन भी गया देखो आ गया दिसम्बर,
चलो अब तुम ही बता दो, कब आओगे गरजते बरसते मेरे अंबर।

जब भी आओ तब लेकर आना बहुत सारा समय तुम्हारे साथ,
नदिया किनारे बैठ कर बतियाएंगे दोनो लेकर हाथों में हाथ।

कल झरोखे के पास बैठ कर सोच रही थी हमदम,की कैसी होगी पहली मुलाकात,
कितना हसीन होगा वो पल , तुम्हारी बाहों में लिपट कर भुला देंगे हर बुरे हालात।

जब देखती हूँ प्यार भरे जोड़ो का साथ, सच कहूं मन मचल उठता है यार,
जल्दी आओ न तुम भी की करनी है हसरतें पूरी और प्यार की हदें अब पार।

मेरे प्यार के तरीके थोड़े जुदा है, जब समझ जाओगे खुद को खुशनसीब तुम पाओगे,
अपने प्यार के वो पहले हसीन और प्यारे पल तुम अपनी अंतिम साँस तक नही भुला पाओगे।


"प्रियंका सिंह" ✍♥

Sunday, 4 February 2018

प्यार?? केवल दिल बहलाना है।





एक प्यारा सा सपना था मेरा..
जिसमे हो साथ मेरा और तेरा!!

तुम जीवन में इस कदर आ गये..
दिल तो दिल तुम तो रुह में समा गये!!

तुम से जो लगाव था उसे प्यार समझ बेठी .
तेरी हर नाजायज़ मांग को मे ज़ायज़ मान बेठी !!

तुझे हर वो चीज दी जिसकी तुझे आस थी..
अब समझ आया जान तुम्हे केवल ज़िस्म की प्यास थी!

तुमसे मोहब्बत की पार की हर हद..
क्युन्कि तुमसे प्यार था मुझे बेहद!!

जिन पलो को लोग हसीन माना करते हैं.. 
वो पल मेरे लिए अब ज़हर का काम करते हैं !!

एक बात आखिर में तुम्हें समझाना हैं..
प्यार का मतलब अब मेरे लिये केवल दिल बहलाना हैं!!
🤐 ❤ 🤐

Sunday, 28 January 2018

रूठे साजन




रुठे साजन!!  रुठे साजन!!
पास हमारे आओ ना !
तुम इतना गुस्सा होकर रह लेते
कैसे? हमको भी बतलाओ ना!!

हम को तुमसे एक पल की भी
दुरी सही जाये ना.. तुम कैसे
रह लेते हो हमको भी बतलाओ ना!!
हमको गले लगाओ ना
पास हमारे आओ ना!!

हवा जैसे तुम बिखर जाते हो
मुझको बडा तडपाते हो!!
बिन मौसम बरसात जैसे
झम - झम बरस जाते हो!!
तुम इतना गुस्सा दिखा कर
मुझको लाल-पिला कर जाते हो!!
फ़िर जब मेरी खोपड़ी घुमे
तुम होले-होले मुझे रिझाते हो!!

रुठे साजन!! रुठे साजन!!
अब उबल रहा मेरा भी खुन हैं..
हो जाउ न कही मे भी गुस्सा
फ़िर ना कहना की मेरी भुल हैं!!

*ज़ज़्बाती कलम* ✍ PJ

Sunday, 7 January 2018

मिले जन्म केवल क्षत्रिय कुल में


इबादत करती हूँ ईश्वर से मिले जन्म केवल क्षत्रिय कुल में
मान मर्यादा को बनाए रखने के लिए हर खुशी जाऊ भूल मैं

जब जब सुनु अपने कानो से माँ पद्मावती के जौहर के किस्से
धधक जाए मेरे अंदर एक ज्वाला मिटा दु दिल से डर के हर हिस्से

जब जब याद आये माँ भवानी का विकराल रूप मेरे तन और मन में
मैं भी  कर दू सर्वनाश दुष्टों का और गाउ गाथा माँ की जन जन में

जब जब जन्म लु इस धरती पर तो ऐसा जीवन मैं पाऊ
पीठ पर बांधे पूत घोटक पर सवार झाँसी की रानी मैं बन जाऊं

कर दु विनाश शत्रु का चुभ जाऊ बन कर उनके सीने मे शूल मैं
इबादत करती हूँ ईश्वर से मिले जन्म मुझे केवल क्षत्रिय कुल में

*प्रियंका PJ* ✍

Tuesday, 2 January 2018

मेरी प्रिय मित्र के लिये ❤



नाम नहीं लुंगी  इस कविता मे तुम्हारा..
बस तुम समझ जाना मेरा इशारा !!

दो वर्ष पुर्व तुम मेरी ज़िन्दगी में आयी थी..
उस वक़्त तुम facebook की महामाई थी!!

एक दिन पहुँच गये inbox में तुम्हारे..
लगने लग गये तुम्हारे हर शब्द प्यारे!!

सोचा नहीं था हो जाओगे तुम इतने खास..
बीकानेर की रानी होगी हमारे दिल के इतने पास!!

फ़िर अन्जानी से मिले अजनबी में बाते हुई अपार
सुबह के good morning से रात के एक से चार !!

गर्मी की भरी जुन में तुम आई गुलाबी नगरी में..
चंद मिनटो की मुलाकात बस गयी दिल में !!

सोच दोनो की अलग है एक की नौ तो एक की सात..
पर दिल से दोनो सच्चे हैं तभी तो जुडे हैं एक साथ !!

अब तो जैसे तुम मेरे लिये एक प्यारा सा अत्र हो..
जीवन हमेशा खुशबुदार रहेगा तुम जो मेरी मित्र हो!!

लडते-झगड़ते हो जाती हैं कभी अनबन..
पर कैसे रहे ये पिहु तुम्हारे बिन *अंजन* !!

क्या हो तुम हमारे लिये समझ गयी जो आप..
दोनो मिलकर छोडेन्गे दोस्ती की नयी छाप !!

*PJ कि कलम * ✍ PJ ❤